March 2, 2026

Seven Chakras: विशेष शक्ति के केंद्र हैं हमारे शर…

Seven Chakras:  हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं – मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्त्रार जो कि इसी क्रम में मानव शरीर में नीचे से ऊपर की तरफ स्थित होते हैं..
February 18, 2026

Piercing: नाक- कान छेदना और खतना: परंपरा, विज्ञान …

Piercing: नाक छिदाना या कान छिदाना या खतना कराना -ये क्रियायें ऊपर से समझ नहीं आतीं पर इनके पीछे काम करता है एक गहरा विज्ञान जो ऊर्चा प्रवाह की दिशा और दशा से जुड़ा
February 12, 2026

Lord Shiva: शिव ही सर्वस्व हैं !…

शिव आदि देव है। वे महादेव हैं, सभी देवों में सर्वोच्च और महानतम शिव को ऋग्वेद में रुद्र कहा गया है। पुराणों में उन्हें महादेव के रूप में स्वीकार किया गया है। श्वेता श्वतरोपनिषद्
February 5, 2026

Maa Shakambhari Devi: माँ शाकंभरी महिमा: जब जगदम्ब…

  हिंदू धर्मग्रंथों में माँ शाकंभरी को ‘प्रकृति की देवी’ और ‘पोषण की अधिष्ठात्री’ माना गया है। माँ का यह अवतार पूर्णतः दया और मानवता के कल्याण को समर्पित है। देवी भागवत पुराण के
February 5, 2026

Tulsi: तुलसी महिमा -आयु, आरोग्य और सौभाग्य प्रदान …

सनातन सृस्कृति में तुलसी को माँ कहा गया है ..इस लेख में जानिये तुलसी के धार्मिक पौधे के विभिन्न अद्भुत लाभ.. हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात्
November 28, 2025

श्री दुर्गियाना मंदिर – Shri Durgiana Mandir…

श्री दुर्गियाना मंदिर जिसे श्री दुर्गियाना तीरथ, लक्ष्मी नारायण मंदिर या शीतला माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है जो की अमृतसर पंजाब में स्थित है। इस मंदिर का नाम देवी दुर्गा से लिया गया है, जो
November 28, 2025

गुरु स्तुति – मंत्र (Guru Stuti)…

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥1 अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥2 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।गुरुरेव परम्ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥3 स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम् ।तत्पदं
November 28, 2025

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र – श्री विष्णु (Gajendr…

श्री शुक उवाच –एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥१॥ गजेन्द्र उवाच –ऊं नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम ।पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥२॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं ।योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥३॥