स्कंदपुराण में महर्षि कात्यायन को याज्ञवल्क्य का पुत्र बताया गया है। वैदिक साहित्य में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कात्यायन श्रौतसूत्र, कात्यायन गृह्यसूत्र, प्रतिहार सूत्र और शुक्ल यजु:पार्षत् जैसे प्रमुख ग्रंथों की
अध्यात्म और नैतिकता के धरातल पर रामायण और महाभारत के दो महान पात्रों—गीधराज जटायु और पितामह भीष्म—का अंत समय हमें कर्म की प्रधानता का एक अत्यंत मार्मिक और गहरा संदेश देता है। यद्यपि