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Sphatik Shila; चित्रकूट की वो दिव्य चट्टान जहाँ आज…

Sphatik Shila: यहाँ इस लेख में उत्तराखंड की धर्मनगरी चित्रकूट में स्थित स्फटिक शिला के महत्व और उससे जुड़ी कथा का रसास्वादन कीजिये.. चित्रकूट की पवित्र भूमि पर, मंदाकिनी नदी के शांत किनारे एक

Maa Shakambhari Devi: माँ शाकंभरी महिमा: जब जगदम्ब…

  हिंदू धर्मग्रंथों में माँ शाकंभरी को ‘प्रकृति की देवी’ और ‘पोषण की अधिष्ठात्री’ माना गया है। माँ का यह अवतार पूर्णतः दया और मानवता के कल्याण को समर्पित है। देवी भागवत पुराण के

Tulsi: तुलसी महिमा -आयु, आरोग्य और सौभाग्य प्रदान …

सनातन सृस्कृति में तुलसी को माँ कहा गया है ..इस लेख में जानिये तुलसी के धार्मिक पौधे के विभिन्न अद्भुत लाभ.. हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात्

रामायण के आठ प्रश्नों के उत्तर…

  रामायण हो या महाभारत दोनों ही धर्म ग्रंथ हिंदू धर्म मानने वालों के लिए बहुत पूजनीय है। इनसे जुड़ी कई बातें ऐसी हैं, जो इन ग्रंथों के बारे में जब देखने या सुनने

जटायु और भीष्म: दो प्रतीक ‘इच्छा मृत्युR…

  अध्यात्म और नैतिकता के धरातल पर रामायण और महाभारत के दो महान पात्रों—गीधराज जटायु और पितामह भीष्म—का अंत समय हमें कर्म की प्रधानता का एक अत्यंत मार्मिक और गहरा संदेश देता है। यद्यपि

श्री दुर्गियाना मंदिर – Shri Durgiana Mandir…

श्री दुर्गियाना मंदिर जिसे श्री दुर्गियाना तीरथ, लक्ष्मी नारायण मंदिर या शीतला माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है जो की अमृतसर पंजाब में स्थित है। इस मंदिर का नाम देवी दुर्गा से लिया गया है, जो

गुरु स्तुति – मंत्र (Guru Stuti)…

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥1 अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥2 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।गुरुरेव परम्ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥3 स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम् ।तत्पदं

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)…

हर बाधाओं को दूर करने हेतु, तनाब मुक्त रहने के लिए, यात्रा प्रारंभ से पहले, बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए, शनि के प्रकोप से बचने हेतु एवं मनोकामनाएं सिद्धि के लिए श्री  हनुमान चालीसा का

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र – श्री विष्णु (Gajendr…

श्री शुक उवाच –एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥१॥ गजेन्द्र उवाच –ऊं नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम ।पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥२॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं ।योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥३॥

शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा (Shukravar Santoshi …

शुक्रवार के दिन माँ संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है। इस पूजा के दौरान माता की आरती, पूजन तथा अंत में माता की कथा सुनी जाती है। आइए जानें! शुक्रवार के दिन की जाने